
झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रही जांच अब और तेज हो गई है। सोमवार को CID ने एक तरफ JPSC की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य के PA बीएन राम को गिरफ्तार किया, वहीं दूसरी तरफ JSSC-CGL मामले में रांची स्थित JSSC कार्यालय पर छापेमारी कर रिकॉर्ड और दस्तावेज खंगाले। इसी जांच के बीच बिहार के भोजपुर निवासी मिथिलेश सिंह की दिल्ली से गिरफ्तारी भी मामले में अहम कड़ी मानी जा रही है।
इंटरव्यू मैनेज कराने के नाम पर 40 लाख लेने का आरोप
CID ने JPSC की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य के निजी सहायक बीएन राम को गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि उसने JPSC इंटरव्यू में उम्मीदवारों को मैनेज कराने और चयन में मदद दिलाने के नाम पर करीब 40 लाख रुपये की वसूली की। यह गिरफ्तारी JPSC अनियमितता मामले में CID की 22वीं गिरफ्तारी बताई जा रही है।
अजिता भट्टाचार्य JPSC की सदस्य रह चुकी हैं और उन्होंने 9 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दिया था। CID इससे पहले उनसे भी पूछताछ कर चुकी है। अब उनके PA की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी इस कथित लेनदेन और इसके पीछे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
भोजपुर के मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी से खुली दूसरी कड़ी
JPSC परीक्षा घोटाले की जांच में बिहार के भोजपुर जिले के आरा निवासी मिथिलेश सिंह का नाम भी सामने आया है। CID ने उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मिथिलेश सिंह पर कथित तौर पर परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंच बनाने और उम्मीदवारों के साथ सांठगांठ का आरोप है।
जांच रिपोर्टों के अनुसार, उसके 24 अभ्यर्थियों के संपर्क में होने और इनमें से 11 से करीब 1.10 करोड़ रुपये लिए जाने का आरोप सामने आया है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
मिथिलेश सिंह को आरके सिंह के नाम से भी जाना जाता है। जांच एजेंसियां उसके परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों और JSSC-CGL में कथित पेपर लीक/अनियमितताओं से संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं।
JSSC ऑफिस में CID की छापेमारी
इसी बीच सोमवार को CID की टीम ने रांची स्थित JSSC कार्यालय में छापेमारी की। जांच के दौरान आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ की गई और परीक्षा से संबंधित रिकॉर्ड व दस्तावेजों की जांच की गई।
जांच का एक अहम हिस्सा JSSC-CGL में चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन भी है। CID यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चयन प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की अनियमितता या दस्तावेजी गड़बड़ी हुई थी या नहीं।
TDPL की भूमिका भी जांच के घेरे में
JSSC की परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। जांच एजेंसी कथित तौर पर कंपनी के अधिकारियों, कर्मचारियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका को खंगाल रही है।
CID की जांच में सामने आए अलग-अलग नामों और गिरफ्तारियों से यह संकेत मिल रहा है कि एजेंसी अब सिर्फ एक परीक्षा या एक व्यक्ति तक सीमित रहने के बजाय पूरे कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
छात्रों का आंदोलन भी जारी
JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। छात्र CBI जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं। सोमवार को सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत का एक और दौर भी प्रस्तावित था।
सरकार की ओर से कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की बात कही गई है, लेकिन छात्र अपनी प्रमुख मांगों को लेकर अब भी आंदोलन पर कायम हैं।
एक साथ कई मोर्चों पर जांच
JPSC के पूर्व सदस्य के PA की गिरफ्तारी, भोजपुर के मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी और JSSC कार्यालय पर छापेमारी—इन तीनों घटनाओं ने झारखंड के भर्ती परीक्षा विवाद को एक नए मोड़ पर ला दिया है।
अब CID की जांच का फोकस कथित तौर पर परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसियों, आयोग से जुड़े लोगों, बिचौलियों, अभ्यर्थियों और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने पर है। जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। अब CID की लगातार कार्रवाई से मामला और गंभीर हो गया है। हालांकि, जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी भूमिका अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोप के स्तर पर ही मानी जाएगी।
