
बांसडीह ब्लॉक के ताजपुर मुड़ियारी इंटर कॉलेज में मिड-डे-मील योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। कक्षा 6 से 8 के बच्चों ने जिलाधिकारी को लिखी गोपनीय चिट्ठी से पूरे मामले का राजफाश हो गया। जांच में करीब 14 लाख रुपये की अनियमितता पकड़ी गई है।
क्या लिखा था बच्चों ने?
बच्चों ने सामूहिक रूप से डीएम को पत्र लिखकर बताया कि स्कूल में मध्याह्न भोजन नहीं बन रहा है, जबकि सरकारी कागजों में रोज करीब 200 बच्चों को खाना खिलाया जा रहा दिखाया जा रहा था। उन्होंने अपना नाम नहीं लिखा। चिट्ठी में साफ लिखा था –
“डीएम साहब, हम अपना नाम नहीं लिख सकते क्योंकि प्रधानाध्यापक चंद्रशेखर पांडेय हम लोगों पर ही कार्रवाई कर देंगे। कृपया मामले की गोपनीय जांच कराइए।”
जांच में क्या निकला?
जिला विकास अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की संयुक्त औचक जांच में पाया गया कि स्कूल में मिड-डे-मील योजना का भौतिक संचालन पूरी तरह बंद पड़ा था। कागजों पर खाना बन रहा था, लेकिन हकीकत में बच्चे भूखे रह रहे थे। यह खेल लगभग दो साल (वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2026-27) से चल रहा था।
जिला समन्वयक एमडीएम को भी इस बात की जानकारी थी, फिर भी फाइलों पर साइन होते रहे।
प्रशासन का एक्शन
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधानाचार्य चंद्रशेखर पांडेय से 14 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश दिया है। साथ ही एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। दोषी अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई भी शुरू की जा रही है।
बच्चों की होशियारी और साहस की वजह से यह बड़ा घोटाला पकड़ा जा सका। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। कई लोग बच्चों की तारीफ कर रहे हैं कि उन्होंने सही वक्त पर सही कदम उठाया।
बलिया का यह मामला सरकारी योजनाओं की निगरानी और रिकॉर्ड की वास्तविकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बच्चों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में करीब 14 लाख रुपये की कथित अनियमितता सामने आना बताता है कि जमीनी स्तर पर योजनाओं की नियमित निगरानी कितनी जरूरी है। अब जांच और एफआईआर के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में और कौन-कौन लोग जिम्मेदार पाए जाते हैं।
