
भारतीय जनता पार्टी की राजनीति का एक बड़ा हिस्सा लंबे समय से सोशल मीडिया के मैदान में भी दिखाई देता रहा है। ऐसे में पार्टी की डिजिटल टीम में हुआ ताजा बदलाव सिर्फ एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि बदलती राजनीतिक रणनीति का संकेत भी माना जा रहा है।
17 अगस्त को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया। इसी फेरबदल में करीब 11 साल तक पार्टी के IT और सोशल मीडिया विभाग की कमान संभालने वाले अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद से मालवीय की भूमिका और बीजेपी की डिजिटल रणनीति में संभावित बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
11 साल बाद अमित मालवीय की जगह नया चेहरा
अमित मालवीय ने 2015 से बीजेपी के IT और सोशल मीडिया विभाग का नेतृत्व किया। इस दौरान वह पार्टी की ऑनलाइन रणनीति के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल रहे।
हालांकि, नितिन नबीन की नई टीम में उन्हें जगह नहीं मिली। उनकी जगह छत्तीसगढ़ से आने वाले दीपक म्हस्के को राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी सूत्रों के मुताबिक मालवीय ने खुद भी अपने भविष्य की भूमिका को लेकर पार्टी नेतृत्व से बातचीत की थी। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित उत्तराधिकारी के नामों पर हुई चर्चा में मालवीय की भूमिका भी रही थी।
तो क्या यह सिर्फ सामान्य संगठनात्मक बदलाव है?
यहीं से कहानी दिलचस्प हो जाती है।
अमित मालवीय को हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इसे हाल के Gen Z आंदोलनों और बीजेपी के डिजिटल प्रदर्शन से जोड़कर देखा जाने लगा। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि युवाओं के बीच सोशल मीडिया पर विपक्ष की सक्रियता ने बीजेपी के सामने नई चुनौती पैदा की है।
लेकिन बीजेपी से जुड़े सूत्रों ने इस तरह की व्याख्या को खारिज किया है। उनका कहना है कि 11 साल तक एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति के बदलाव को केवल हाल की घटनाओं से जोड़ना सही नहीं होगा। पार्टी के भीतर क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण भी नियुक्तियों में भूमिका निभाते हैं।
मालवीय के बाद दीपक म्हस्के क्यों?
दीपक म्हस्के का प्रोफाइल अमित मालवीय से काफी अलग है।
म्हस्के मूल रूप से केमिस्ट्री के शिक्षक रहे हैं। उनके पास केमिस्ट्री में मास्टर्स के अलावा कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और सीमेंट टेक्नोलॉजी से जुड़ी ट्रेनिंग भी है। बीजेपी में उनका काम सोशल मीडिया की आक्रामक सार्वजनिक मौजूदगी से ज्यादा डेटा, चुनावी विश्लेषण और कैंपेन मैनेजमेंट से जुड़ा रहा है।
बीजेपी नेताओं के मुताबिक, म्हस्के ने कई चुनावों में वोटर डेटा और लाभार्थी डेटाबेस से जुड़े काम में योगदान दिया है।
यानी पार्टी ने इस बार सोशल मीडिया की कमान ऐसे व्यक्ति को दी है जिसकी पहचान ऑनलाइन बयानबाजी से ज्यादा डेटा और रणनीति से रही है।
और तभी सामने आए नई टीम के पुराने X पोस्ट
बीजेपी की नई सोशल मीडिया टीम के गठन के तुरंत बाद कुछ नए पदाधिकारियों के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गए।
रिपोर्टों के मुताबिक, टीम में शामिल कुछ लोगों के पुराने X पोस्टों में आपत्तिजनक, विवादित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील टिप्पणियां थीं। इनमें कुछ पोस्टों को लेकर आलोचना हुई और कुछ अकाउंट्स से पुराने पोस्ट हटाए या सीमित किए जाने की बात सामने आई।
यही वजह है कि बीजेपी की नई डिजिटल टीम के सामने आने के साथ ही उसके सदस्यों की पुरानी सोशल मीडिया गतिविधियां भी जांच और बहस का विषय बन गई हैं।
हालांकि, इन पुराने पोस्टों का हटना या अकाउंट में बदलाव अपने आप में यह साबित नहीं करता कि बीजेपी ने किसी व्यक्ति पर कार्रवाई की है। अमित मालवीय के पद से हटने और इन पोस्टों के विवाद के बीच भी अभी कोई आधिकारिक सीधा संबंध सामने नहीं आया है।
बीजेपी के लिए डिजिटल राजनीति क्यों अहम?
आज चुनाव सिर्फ रैलियों, पोस्टरों और टीवी बहसों तक सीमित नहीं हैं। युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए Instagram, YouTube, X और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं।
इसी वजह से बीजेपी की नई सोशल मीडिया टीम में बदलाव को आने वाले चुनावों की तैयारी के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
अमित मालवीय का दौर पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन के आक्रामक और तेज राजनीतिक जवाबों के लिए जाना गया। अब दीपक म्हस्के के सामने चुनौती होगी कि वह इसी नेटवर्क को डेटा और संगठनात्मक रणनीति के साथ किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
क्या बदलने वाला है बीजेपी का सोशल मीडिया मॉडल?
दीपक म्हस्के ने पद संभालने के बाद गलत सूचना यानी misinformation से लड़ने को अपनी प्राथमिकताओं में बताया है। उनका जोर लगातार और तथ्य आधारित जवाबों के जरिए लोगों की गलतफहमियां दूर करने पर रहने की बात सामने आई है।
इससे संकेत मिलता है कि बीजेपी की डिजिटल रणनीति में आने वाले समय में सिर्फ राजनीतिक प्रतिक्रिया देने के बजाय डेटा, नैरेटिव मैनेजमेंट और संगठित डिजिटल आउटरीच पर ज्यादा जोर हो सकता है।
असली कहानी अभी बाकी है
अमित मालवीय का 11 साल बाद IT सेल की कमान से हटना अपने आप में बड़ा बदलाव है। लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि बीजेपी उनकी जगह आए दीपक म्हस्के के नेतृत्व में अपनी डिजिटल मशीनरी को किस दिशा में ले जाती है।
एक तरफ नई टीम को लेकर पुराने सोशल मीडिया पोस्टों का विवाद सामने आया है, दूसरी तरफ पार्टी ने डिजिटल कमान एक ऐसे रणनीतिकार को दी है जिसकी पहचान डेटा और चुनावी विश्लेषण से है।
इसलिए फिलहाल सवाल सिर्फ यह नहीं है कि अमित मालवीय क्यों हटे?
बड़ा सवाल यह है कि क्या बीजेपी अपने डिजिटल राजनीति के तरीके को भी बदल रही है?
आने वाले चुनावों में इसका जवाब सोशल मीडिया पर बीजेपी की भाषा, रणनीति और कैंपेन से मिल सकता है।
बीजेपी की नई डिजिटल टीम में बदलाव ने पार्टी की सोशल मीडिया रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अमित मालवीय की 11 साल की भूमिका के बाद दीपक म्हस्के की एंट्री और नई टीम के पुराने पोस्टों पर उठे सवाल—दोनों संकेत देते हैं कि बीजेपी का डिजिटल वॉर रूम अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है।
