
भोजपुर/पटना: बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला राज्यभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी को पुलिस ने 16 जून को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताते हुए उनके इलाज की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी। हालांकि अगले ही दिन पुलिस और STF की कार्रवाई के दौरान उन्हें गोली लग गई। गंभीर रूप से घायल भरत को पहले शाहपुर रेफरल अस्पताल, फिर आरा सदर अस्पताल और बाद में PMCH पटना रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
भरत भूषण तिवारी भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के निवासी थे और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहते थे। घटना से पहले उन्होंने फेसबुक लाइव और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकारी व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाए थे। पुलिस का दावा है कि कार्रवाई के दौरान भरत ने फायरिंग की, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में गोली चलाई गई। वहीं परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था और यह फेक एनकाउंटर का मामला है।
घटना के बाद इलाके में विरोध प्रदर्शन हुए और मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। बढ़ते विवाद को देखते हुए शाहपुर थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। मामले की मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी गई है और फॉरेंसिक व बैलिस्टिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच तथा CBI जांच की मांग की है।
